Uttarkashi Tunnel Rescue: 12 रैट-होल माइनर, 27 घंटे की मेहनत से चीर डाला पहाड़… टनल रेस्क्यू ऑपरेशन के ये हैं हीरो, जानें कितना मिला इनाम

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नई दिल्लीः उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के निर्माणाधीन सिलक्यारा टनल धंसने के कारण मलबे में फंसे 41 मजदूरों को 17वें दिन सुरक्षित निकाल लिया गया. युद्धस्तर पर चले इसे बचाव कार्य में विदेशी एक्सपर्ट के साथ-साथ विदेशी मशीनों की भी मदद ली गई. लेकिन कुछ खास सफलता नहीं मिली. लेकिन 27 नवंबर को मैनुअल ड्रिलिंग के लिए आए रैट माइनर्स ने महज डेढ़ दिन में खुदाई पूरी कर दी और मजदूरों तक पाइप पहुंचा, जिसके जरिए एक-एक कर सभी 41 मजदूर निकल आए. फिरोज, नासिर, नसीम, ​​मुन्ना, मोनू, इरशाद… उत्तर प्रदेश के झांसी के 12 ऐसे ‘रैट माइनर्स’ ने 12 नवंबर से उत्तरकाशी में सिल्कयारा सुरंग के अंदर फंसे 41 लोगों तक पहुंचने के लिए रास्ता खोदने के लिए 36 घंटे का समय मांगा था. उन्होंने महज 27 घंटों के भीतर काम पूरा कर लिया, जिससे टनल रेस्क्यू ऑपरेशन में मानवीय भावना की जीत हुई.

गब्बर सिंह और शबा अहमद ने टनल के भीतर दिखाई बेहतर नेतृत्व
हालांकि इन नायकों के बीच एक अन्य नायक और भी था, वह एक 6 इंच का पाइप था. जिसके जरिए 20 नवंबर से मजदूरों को ठोस भोजन पहुंचना शुरू हुआ और बचाव कार्य में जुटी टीमों के साथ कम्युनिकेशन भी शुरू हुआ. इससे सुरंग में फंसे मजदूरों का मनोबल और उत्साह बढ़ गया. इसके अलावा इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में अन्य महत्वपूर्ण कारक यह था कि फंसे हुए मजदूरों में से दो, गब्बर सिंह और शबा अहमद ने सुरंग के अंदर नेतृत्व की भूमिका निभाई और अन्य श्रमिकों को प्रेरित किया और सुनिश्चित किया कि टीम-भावना और मनोबल ऊंचा रहे.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मजदूरों से की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल रात 41 मजदूरों से 15 मिनट की लंबी फोन-कॉल के दौरान गब्बर सिंह और अहमद को बधाई दी और बेस्ट लीडरशिप दिखाने के लिए दोनों की प्रशंसा की. पीएम मोदी ने कहा, ‘किसी विश्वविद्यालय को आप दोनों गांव के लोगों द्वारा दिखाए गए नेतृत्व पर एक केस-स्टडी करनी चाहिए. आपने अपने साथी मजदूरों को प्रेरित किया.’ गब्बर सिंह और अहमद ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि कैसे मजदूर गाने सुनकर, योग करके और सुरंग के अंदर लंबी सैर करके खुद को व्यस्त रखते थे.

पहले बिछाई गई चार इंच का पाइप
12 नवंबर की सुबह 5:30 बजे जब सिल्कयारा सुरंग में मलबा गिरने की सूचना मिली तो केंद्र तुरंत हरकत में आ गया था. ऑगर ड्रिलिंग मशीन को हवाई मार्ग से साइट पर लाया गया और ड्रिलिंग की प्रक्रिया शुरू हुई. 20 नवंबर तक हालात कठिन थें. क्योंकि फंसे हुए मजदूरों के लिए केवल चार इंच का पाइप ही सहारा था और उन्हें केवल सूखे मेवों पर ही जीवित रहना था. लेकिन 20 नवंबर को छह इंच का पाइप मजदूरों तक पहुंच सका.

6 इंच का पाइप बना बड़ा जीवनदान
यह 6 इंच की पाइप एक जीवन रेखा साबित हुई. क्योंकि बीएसएनएल द्वारा श्रमिकों के साथ एक संचार लाइन स्थापित की जा सकी और श्रमिकों के वीडियो प्राप्त करने के लिए एक कैमरा भेजा गया. श्रमिकों को स्वस्थ और उत्साहित रखने के लिए दवाओं और फोन चार्जर के साथ ठोस भोजन भी भेजा गया था. कर्मचारी सुरंग में तैनात अधिकारियों, मनोवैज्ञानिकों के साथ-साथ अपने परिवारों से बात करने के लिए फोन लाइन का उपयोग कर सकते हैं. अधिकारियों ने कहा कि इससे फंसे हुए मजदूरों का मनोबल बढ़ गया.

रैट माइनर्स ने मांगा था 36 घंटे का समय
बीते 17 नवंबर को ऑगर मशीन खराब हो जाने के बाद बचाव कार्य में जो झटका लगा था, वह कम हो गया. अधिकारियों ने विशेषज्ञों की सलाह पर अमल किया और मैन्युअल खुदाई करने के लिए इस सप्ताह की शुरुआत में दिल्ली स्थित एक फर्म से 12 रैट-होल माइनर्स को बुलाया. रैट माइनर्स ने स्पष्ट रूप से काम पूरा करने के लिए 36 घंटे का समय मांगा था क्योंकि उनमें से दो ने मैन्युअल रूप से ड्रिलिंग की बाकी रैट माइनर्स ने मलबे को सुरंग से बाहर निकाला था.

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27 घंटे में रैट-माइनर्स ने बिछा दी पाइप
रैट माइनर्स ने अपने लक्ष्य से पहले, 27 घंटों के भीतर सफलता हासिल कर ली, और अंततः 41 श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए कल शाम एक वेल्डेड पाइप डाला गया. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के लोग श्रमिकों को पाइप से बाहर लाने के लिए अंदर गए और शाम 7:50 बजे सबसे कम उम्र के श्रमिक के बाहर आने के बाद पूरी प्रक्रिया 45 मिनट के भीतर पूरी हो गई. अंततः, मिशन मोड में केंद्र और राज्य की ओर से ‘संपूर्ण सरकार’ के दृष्टिकोण और रैट माइनर्स ने चमत्कार किया.

Tags: CM Pushkar Singh Dhami, Uttarakhand news, Uttarkashi News

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