राजस्थान में कंगाल हो रही बिजली कंपनियां, मुफ्त बिजली योजना पर आ सकता है संकट, पढ़ें Inside Story

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हाइलाइट्स

राजस्थान में बिजली कंपनियों के हालात
घाटे का नया रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं कंपनियां
कृषि उपभोक्ताओं को दो हजार यूनिट फ्री मिल रही है

जयपुर. राजस्थान में बिजली कंपनियां कंगाल होने के मुहाने पर पहुंच चुकी हैं. फ्री बिजली के फेर में बिजली कंपनियां रिकॉर्ड घाटे की ओर से बढ़ रही हैं. राजस्थान में चुनावी साल में गहलोत सरकार की ओर से घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 200 यूनिट और कृषक उपभोक्ताओं को प्रति माह 2 हजार यूनिट बिजली फ्री दी जा रही है. भले ही बिजली कंपनियां घाटे के रिकॉर्ड पर नजरें गड़ाए हुए हैं लेकिन आम उपभोक्ता इस बात को लेकर संशय में है कि क्या नई सरकार आने के बाद चाहे वह कांग्रेस हो या बीजेपी की क्या उसे मुफ्त बिजली का तोहफा मिलता रहेगा या बंद हो जाएगा.

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है. तीन दिसंबर को चुनाव परिणाम आ जाएगा. मतगणना के बाद सियासत का सिकंदर कौन बनेगा इसका लोगों को बेसब्री से इंतजार है. हार जीत की हलचल के बीच इस बात की चर्चा भी जोरों पर है कि सरकार चाहे की कांग्रेस आए या बीजेपी की क्या राजस्थान में मुफ्त बिजली योजना चलती रहेगी या बंद हो जाएगी. राजस्थान की बिजली कंपनियां ऐतिहासिक घाटे की ओर अग्रसर हैं. लिहाजा मुफ्त बिजली के मुद्दे पर बिजली कंपनियों में असमंजस बना हुआ है.

राजस्थान में कंगाल हो रही बिजली कंपनियां, मुफ्त बिजली योजना पर आ सकता है संकट, पढ़ें Inside Story

15180 करोड़ से ज्यादा का वित्तीय भार डिस्कॉम पर आ चुका है
बिजली कंपनियों के सूत्रों के मुताबिक सरकार की सब्सिडी के कारण 15180 करोड़ से ज्यादा का वित्तीय भार डिस्कॉम पर आ चुका है. वहीं विद्युत कंपनियां पहले से ही करीब 1 लाख 20 हजार करोड़ से ज्यादा के घाटे में चल रही है. सब्सिडी के खर्चे के लिए विद्युत कंपनियों को बैंकों से प्रति वर्ष 60 हजार करोड़ का लोन लेना पड़ता है. उसका सालाना ब्याज ही लगभग 6500 करोड़ रुपये से ज्यादा होता है. इससे पहले से लगातार घाटे में चल रही बिजली कंपनियां और घाटे में आ गईं. अब राजस्थान की बिजली कंपनियां घाटे के रिकॉर्ड को तोड़ने जा रही है.

सरकार या तो पुनर्भरण करे या फिर मुफ्त की बिजली देना बंद करे
बिजली उपभोक्ताओं को चुनाव संपन्न होने के बाद राहत योजना का लाभ मिलेगा या नहीं बिजली कंपनियों का कोई भी प्रतिनिधि कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है. लेकिन वे दबी जुबां यह कहने से नहीं चूकते हैं कि नई सरकार से मार्गदर्शन मांग कर लगातार हो रहे घाटे की जानकारी दी जाएगी. सरकार या तो पुनर्भरण करे या फिर मुफ्त की बिजली देना बंद करे.

कांग्रेस और बीजेपी में चल रहे आरोप-प्रत्यारोप
वहीं इस मसले पर योजना शुरू करने वाली कांग्रेस के प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी का कहना है कि राजस्थान के बेहतर वित्तीय प्रबंधन से राजस्थान देश में नंबर वन है. सभी योजनाएं दूरदर्शी सोच के साथ शुरू की गई हैं. वे जारी रहेंगी. वहीं बीजेपी के प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने का कहना है कि कांग्रेस ने राजस्थान को घाटे दर घाटे दिए हैं. अब सरकार जब जा रही है तो कांग्रेस की कलई खुल रही है.

Tags: Electricity, Jaipur news, Rajasthan elections, Rajasthan news

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